प्रत्येक जिला कार्य योजना बनाकर 4 फरवरी तक प्रेषित करें : अमित

0
18

झांसी। बुन्देलखण्ड में खरीफ का आच्छादन बढ़ाने के लिये सभी को सामूहिक प्रयास करने होंगे तभी सफलता प्राप्त होगी। ऐसा गांव जहां आच्छादन 95 प्रतिशत होता है वहां की मांग के अनुसार सुविधायें दी जायेगी। मण्डी परिषद की मण्डियों में अतिरिक्त भूमि यदि प्रोसेसिंग यूनिट लगाना चाहे तो स्वागत है 33 साल की लीज के साथ छूट भी उपलब्ध करायी जायेगी। उत्पादन बढ़ने में किसान को नुकसान नहीं होगा। उसकी फसल को केन्द्र स्थापित कर क्रय किया जायेगा। खरीफ के आच्छादन को बढ़ाने के लिये माह जून तक सभी जिलो में गोष्ठियां कर ली जाये ताकि बुवाई के समय किसान गोष्ठियों का लाभ ले सके। शासन द्वारा कम्पोस्ट यूनिट स्थापित करने हेतु अनुदान दिया जा रहा है अधिक से अधिक लाभ लें।
यह उद्गार प्रमुख सचिव कृषि उ.प्र अमित मोहन प्रसाद ने बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खरीफ आच्छादन बढ़ाने एवं कृषि के विकास की योजना हेतु अधिकारियों वैज्ञानिको एवं किसानों से परिचर्चा करते हुये व्यक्त किये। झांसी, चित्रकूट धाम, मण्डल की संयुक्त बैठक में प्रमुख सचिव ने कहा कि यह समस्त सामायिक में है जहां आज परिचर्चा कर खरीफ आच्छादन में बढ़ोत्तरी हेतु मूल्य सुझाव प्राप्त हुये। शासन स्तर से जो खरीफ हेतु रोड मैप बनाया गया उसे और प्रभावशाली बनाने के लिये महत्वपूर्ण सुझाव मिल गये।
विकास भवन सभागार में उन्होंने कहा कि जिलो में प्रत्येक दशा में 4 फरवरी तक कार्य योजना बनाकर मुख्यालय प्रेषित करें। बुन्देलखण्ड में समास्यायें है लेकिन समस्याओं को दूर कर उत्पादन में बढ़ोत्तरी करना लक्ष्य है। क्षेत्र में अन्ना पशुओ की समस्या के लिए उन्होंने किसानों को ही जिम्मेदारी का सुझाव दिया।
उन्होंने ने कहा कि किसान किसी भी कम्पनी से कृषि यंत्र क्रय कर सकता है लेकिन उसे फर्म से बिल लेना होगा, ताकि उसे कृषियंत्र अनुदान बैंक खाते में पहुंचाया जा सके। यदि किसी जिले में समस्या है तो अधिकारी उसे स्वयं देख लें। उन्होंने उत्पादकता का उत्पादन में बढ़ोत्तरी हेतु किसानों को स्वयं बीज तैयार करने का सुझाव दिया। उन्होंने कृषि उत्पादन संघ को गांव-गांव बीज तैयार करने का या बीज बैंक बनाये जाने का सुझाव दिया। बुन्देलखण्ड में खरीफ आच्छादन बढ़ाने के लिये परिचर्चा का शुभारम्भ बुन्देलखण्ड के सातो जिलो में आये 2-2 किसानों के सुझाव से हुआ।
परिचर्चा में कृषि वैज्ञानिक डॉ.पी.के सोनी ने फसल में लगाने वाले रोगों व उपचार तथा गर्मी प्लान के वितरीत जुताई करनेकी जानकारी दी। डॉ.आर.के तिवारी वैज्ञानिक कृषिवानिकी ने पानी के व्यवस्थापन से आच्छादन में बढ़ोत्तरी तथा एग्रोथोपस्टी पर जोर दिया। संजय सिंह ने कहा कि जहां वाटर लेविल अच्छा होगा। वहां आच्छादन में बढ़ोत्तरी होगी।
उपकृषि निदेशक बरेली डॉ. यूपी सिंह ने बुन्देलखण्ड में खरीफ आच्छादन बढ़ाने हेतु वह मूल्य विचार आंकड़ो के साथ प्रस्तुत किये। निदेशक कृषि सौराज सिंह ने किसानों का आभार प्रकट किया व परिचर्चा में बहुमूल्य सुझाव के प्रति धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि जहां कांवर मिट्टी है वहां आच्छादन बढ़ाने के लिये पानी को रोकना होगा तभी बढ़ोत्तरी होगी।
इस मौके पर अपर कृषि निदेशक उ.प्र राजेन्द्रधर द्विवेदी, अपर निदेशक रामलखन राजपूत, अपर कृषि निदेशक सामान्य एस.आर. कौशल, उ.प्र कृषि निदेशक, सी.पी श्रीवास्तव, चित्रकूट धाम मण्डल के संयुक्त निदेशक कृषि, उप कृषि निदेशक जिला अधिकारी सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।

LEAVE A REPLY