फर्जी थी हरकनपुरा की मुठभेड़, जाँच में खुली सुनीत कुमार की करतूत

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झाँसी। मऊरानीपुर थाना क्षेत्र के हरकनपुरा में पिछले दिनों हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह यादव के साथ हुई पुलिस मुठभेड़ पूरी तरह से मैनेज थी। इसका खुलासा एएसपी अभिषेक कुमार की जाँच से हो गया है।
मऊरानीपुर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक (निवर्तमान) सुनीत कुमार ने पुलिस मुख्यालय पर सूचित किया था कि हरकनपुरा के पास वह अपनी टीम के साथ गश्त कर रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह अपने पुत्र जयहिन्द समेत आधा दर्जन लोगों के साथ हरकनपुरा आने वाला है। वे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। इसी दौरान लेखराज सिंह यादव कार से वहाँ आया। उसे देख पुलिस ने ललकारा, तो उसने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। दोनों ओर से 46 मिनट 56 राउण्ड फायरिंग हुई, लेकिन लेखराज सिंह यादव भागने में सफल हो गया। इसी दिन रात को एक ऑडियो वायरल हुआ था। इस ऑडियो में कोतवाल लेखराज से मुठभेड़ के सम्बन्ध में बात कर रहा था। साथ ही मुठभेड़ से बचने के लिए कुछ नेताओं से बात करने के लिए कह रहा है। इस ऑडियो के वायरल होने से पुलिस महकमे में तूफान उठ गया था। मामले की जाँच एएसपी अभिषेक कुमार को सौंपी गयी थी। अभिषेक कुमार ने बीते रोज रिपोर्ट डीआईजी जवाहर व एसएसपी विनोद कुमार सिंह को सौंप दी थी। इस मामले में सुनीत कुमार को दोषी मानते हुए डीआईजी ने बर्खास्त कर दिया।
वहीं मुठभेड़ की भी जाँच एएसपी अभिषेक कुमार कर रहे थे। उन्होंने उस मिनी बस का भी परीक्षण किया था, जिसमें बैठकर पुलिस टीम मुठभेड़ के लिए गयी थी। बस पर गोली का निशान बताया गया था, लेकिन उसके अन्दर कहीं भी बुलेट नहीं मिली थी। इसके अलावा एएसपी ने मुठभेड़ में भाग लेने वाले दरोगाओं व पुलिस कर्मियों के भी बयान लिये थे। पहले तो पुलिस कर्मियों ने मुठभेड़ सही का ठप्पा लगा दिया था, लेकिन सुनीत कुमार के खिलाफ हुई कार्यवाही के भय से दबे मुँह से पुलिस कर्मियों ने एएसपी को सच्चाई बता दी। यही नहीं एएसपी को हरकनपुरा में भी मुठभेड़ के कहीं साक्ष्य नहीं मिले और न ही किसी ग्रामीणों ने इसकी पुष्टि की।
इस मामले में एसएसपी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि ऑडियो, घटनास्थल, पुलिस कर्मियों व ग्रामीणों से पूछताछ के दौरान कहीं भी मुठभेड़ के साक्ष्य नहीं मिले। इससे साबित होता है कि मुठभेड़ फर्जी थी।

ऑडियो की नहीं हुई फॉरेन्सिक जाँच
झाँसी। हिस्ट्रीशीटर लेखराज सिंह यादव से मुठभेड़ को लेकर मोबाइल पर हुई बातचीत मामले में दोषी मऊरानीपुर कोतवाल सुनीत कुमार को डीआईजी जवाहर ने बर्खास्त कर दिया है, लेकिन यहाँ अधिकारियों के गले की फाँस ऑडियो की फॉरेन्सिक जाँच बन सकती है। कारण है कि अधिकारियों ने लेखराज सिंह यादव के मध्य हुई बातचीत की ऑडियो की फॉरेन्सिक जाँच कराये बिना ही सुनीत कुमार को निलम्बित कर दिया। अगर अधिकारी फॉरेन्सिक जाँच की बात करते हैं, तो यह किसी के गले नहीं उतरेगी। कारण है कि फॉरेन्सिक जाँच की रिपोर्ट को महीनों लग जाते हैं, फिर दो-तीन दिन के अन्दर जाँच कैसे सम्भव है। यह यक्ष सवाल है।
जानकारों का कहना है कि फॉरेन्सिक जाँच के बिना सुनीत कुमार को बर्खास्त करना पुलिस अधिकारियों के लिए महँगा पड़ सकता है। इसका लाभ उसे सीधा न्यायालय में मिलेगा।

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