पुलिस-पब्लिक को साथ मिलकर काम करने की जरूरत : एडीजी

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-महिलायें अधिकारों के प्रति हों जागरूक तभी रुकेगा उत्पीड़न
– मन की स्थिति और बाहर की परिस्थिति में होता फर्क
उरई (जालौन)। अपर पुलिस महानिदेशक कानपुर जोन अविनाश चंद्र ने कहा कि पुलिस और पब्लिक एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। यदि दोनों मिलकर काम करेंगे निश्चित रूप से समाज में व्याप्त अपराध ही नहीं बल्कि अपराधियों पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है।
स्थानीय इंदिरा पैलेस सभागार में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुये एडीजी ने कहा कि समाज में अपराधों की रोकथाम के लिये पुलिस और पब्लिक को साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता हैं इसके लिये सार्थक पहल होनी चाहिये ताकि दोनों एक दूसरे पर विश्वास कर सके। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों का प्रयास होना चाहिये कि जो भी पीड़ित उनके पास अपनी समस्या लेकर पहुंचे उसे न्याय दिलाने का प्रयास करे। यदि किसी व्यक्ति के आसपास कोई भी आपराधिक क्रिया कलाप होते हों तो वह उसकी जानकारी पुलिस को दे ऐसे लोगों के नाम गुप्त रखे जायेंगे। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने छात्राओं व महिलाओं को इस बात के लिये सचेत किया कि वह यात्रा के दौरान किसी भी व्यक्ति पर विश्वास न करें। अनजान व्यक्ति को अपना मोबाइल नंबर न दें। उन्होंने पुलिस अधीक्षक को निर्देशित किया कि वह अगले शैक्षणिक सत्र में छात्राओं को आत्म सुरक्षा करने का प्रशिक्षण दिलाया जाये ताकि किसी अनहोनी घटना के दौरान वह अपना बचाव कर सकें। एडीजी अविनाश चंद्र ने बताया कि यदि कोई महिला अपने बचाव में किसी व्यक्ति पर हमला करती है तो वह अपराध की श्रेणी में नहीं आता है। उन्होंने कहा कि महिलायें अपने बचाव में मिर्ची पाउडर का भी प्रयोग कर सकती है। आटो में सवारी के दौरान वह उस पर अंकित नंबर का फोटो मोबाइल में ले और यदि उनके साथ अभद्रता हो तो वह उसी फोटो को पुलिस के पास भेज दें ताकि संबंधित आटो चालक पर कार्रवाई सुनिश्चित करायी जा सके। संगोष्ठी को पुलिस अधीक्षक एपी सिंह, अपर पुलिस अधीक्षक एसएन तिवारी, स्वयंप्रभा दुबे, ब्रह्माकुमारी आश्रम की मीना बहिन, छात्रा अंजलि, आयुषी पांडेय सहित अनेकों वक्ताओं ने संबोधित किया। अंत में एडीजी अविनाश चंद्र में समाजसेविका सुबिधा इटौरिया को सम्मानित भी किया।

मां-बाप से बड़ा हितैषी कोई नहीं होता
अपर पुलिस महानिदेश कानपुर जोन अविनाश चंद्र ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुये कहा कि माता-पिता ही अपने पुत्र और पुत्रियों के हितैषी होते हैं। उनकी बातों को अनसुना न करें। बल्कि उनकी कही बातों पर चिंतन कर उस पर अमल करने की आदत डालें। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को भी चाहिये कि वह अपने पाल्यों की शिकायत पर शिक्षकों को दोष न दें बल्कि शिक्षक से शिकायत के बारे में पूरी बात समझें फिर निर्णय लें।

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