सीएम योगी और उनके आवास की सूचना नही मिलेगी उनके कार्यालय से

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय ने मुख्यमंत्री की शैक्षिक योग्यताओं और उनके लखनऊ स्थित आधिकारिक आवास से सम्बंधित सूचनाओं को सूचना के अधिकार के तहत देने से इन्कार कर दिया है। चौंकाने वाला यह खुलासा लखनऊ के आरटीआई कंसलटेंट संजय शर्मा द्वारा दायर की गई एक आरटीआई पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुभाग अधिकारी और जन सूचना अधिकारी बसंत कुमार तिवारी द्वारा दिए गए एक जबाब से हुआ है।
बताते चलें कि लोकजीवन में पारदर्शिता और जबाबदेही और मानवाधिकार संरक्षण के लिए काम कर रहे संजय शर्मा ने बीते साल के मई महीने की 5 तारीख को यूपी के मुख्यमंत्री के कार्यालय में एक आरटीआई अर्जी देकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कक्षा 8 से आगे की शैक्षिक योग्यताओं के प्रमाणों ‘योगी के शपथग्रहण के बाद मुख्यमंत्री आवास में कराये गए रेनोवेशन वर्क की संस्तुतियों सहित खर्चों’ बिजली बिल और नगर निगम लखनऊ के बकाया टैक्स की धनराशि आदि के सम्बन्ध में 8 बिन्दुओं पर सूचना माँगी थी।
मुख्यमंत्री कार्यालय के जन सूचना अधिकारी बसंत कुमार तिवारी ने बीती 13 फरवरी को संजय को एक पत्र भेजा है जिसमें प्रशासनिक सुधार अनुभाग-2 की अधिसूचना दिनांक 03-12-2015 की धारा 4(5) की व्यवस्था का जिक्र करते हुए माँगी गई सूचना दो से अधिक लोक प्राधिकरणों गोपन विभाग, राज्य संपत्ति विभाग, ऊर्जा विभाग और नगर विकास विभाग द्वारा धारित होने की बात कही है और सूचना देने से मना कर दिया है।
संजय का कहना है कि सूचना का अधिकार कानून की धारा 4(1) (इ) के तहत यह सभी सूचनाएं स्वतः स्फूर्त रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध होनी चाहिए। उन्होंने इस मामले में अपनी आपत्तियां देते हुए एक अपील राज्य सूचना आयोग में डाली है जो आने वाले 5 मार्च को मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी द्वारा सुनी जायेगी। संजय ने 5 मार्च को अपनी बात आयोग के सामने रखकर उनके द्वारा माँगी गई सूचना सार्वजनिक करने की मांग रखने की बात कही है।
अपने द्वारा माँगी गई सूचना को बृहद लोकहित से जुड़ा मुद्दा बताते हुए पंजीकृत सामाजिक संगठन ‘तहरीर’ के संस्थापक अध्यक्ष संजय शर्मा ने अपनी संस्था की और से योगी को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री कार्यालय में सूचना का अधिकार कानून की धारा 4(1)(इ) का अनुपालन नहीं होने की अनियमितता का उत्तरदायित्व निर्धारण करके एक्ट का अनुपालन नहीं करने के दोषी कर्मचारियों को दण्डित करने की मांग रखने की बात कही है।

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