कदौरा में फ्लाप शो साबित हुई भाजपा की रणनीति

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-ब्लाक प्रमुख को मिला जीवनदान
-कोरम के अभाव में पारित नही हो सका अविश्वास प्रस्ताव
उरई (जालौन)। प्रदेश की सत्ता पर कब्जा जमाने के बाद अब भाजपा ब्लाक मुख्यालयों को भगवामय बनाने के मिशन में जुटी हुयी है। पिछले दिनों कुठौंद ब्लाक प्रमुख को पटखनी देने के बाद आज गुरुवार को कदौरा ब्लाक प्रमुख को बेदखल करने का अवसर था। लेकिन भाजपा को यहां सफलता हाथ नहीं लगी। इसी के साथ जनपद के राजनैतिक हल्कों में चर्चायें चलने लगी कि कदौरा में भाजपा की रणनीति फ्लाप शो साबित रही। ताज्जुब की बात तो यह है कि अविश्वास प्रस्ताव पास होने का दम भरने वाले क्षेत्रीय भाजपा विधायक व उनकी मंडली के साथ ही पार्टी की जिला इकाई के जिम्मेदार पदाधिकारी कदौरा में कहीं नजर ही नहीं आये। तो वहीं समाजवादी पार्टी के नेता व कार्यकर्ता पूरी तरह से सक्रिय नजर आये।
कदौरा में सपा के ब्लाक प्रमुख को अविश्वास प्रस्ताव में जीवनदान मिल गया। कोरम के अभाव में अविश्वास प्रस्ताव के लिए बुलाई गई बैठक आयोजित नही हो पाई। जिससे मत विभाजन की नौबत ही नही आई और प्रस्ताव निरस्त हो गया। कदौरा के ब्लाक प्रमुख विजय निस्बा के खिलाफ गत दिनों जिला मजिस्ट्रेट को 63 क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा हस्ताक्षरित अविश्वास प्रस्ताव सौंपा गया था। जिस पर जिला मजिस्ट्रेट ने 15 फरवरी मत विभाजन की तारीख तय कर दी थी। इस मामले को राजनैतिक हल्कों में भाजपा की पराजय के रूप में देखा जा रहा है। आज गुरुवार को जब मत विभाजन होना था तो कालपी के उप जिलाधिकारी के पहुंच जाने के बाद 91 सदस्यीय क्षेत्र पंचायत के सदन में वांछित 46 से कम सदस्य पहुंचे। कोरम लायक सदस्य न पहुंच पाने पर उपजिलाधिकारी ने बैठक निरस्त कर दी। बाद में भाजपा नेताओं का एक दल क्षेत्र पंचायत सदस्यों के साथ जिला मजिस्ट्रेट से मिलने मुख्यालय पर आया लेकिन जिला मजिस्ट्रेट के मौजूद न होने से उसे बैरंग लौटना पड़ा। इस दल में शामिल प्रमुख भाजपा नेता भारत सिंह यादव आजाद ने आरोप लगाया कि सपा के लोगों की गुंडागर्दी की वजह से क्षेत्र पंचायत सदस्य बैठक में भाग नही ले सके। इसलिए भय मुक्त व्यवस्था सुनिश्चित कर जिला मजिस्ट्रेट को नये सिरे से अविश्वास प्रस्ताव की बैठक तय करनी चाहिए। फिलहाल तो कदौरा ब्लाक प्रमुख के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित न होने के बाद भाजपा के जिम्मेदार पदाधिकारी विचार मंथन में जुटे हुये थे। समाचार लिखे जाने तक इस बात की जानकारी नहीं मिल पायी थी कि भाजपाइयों ने गोपनीय बैठक में क्या निर्णय लिया।

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