नौशाद की छुट्टी, सिद्धार्थ को बुंदेलखंड जोन की कमान

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– पार्टी का जनाधार वापस लाने के लिए बसपा का बड़ा फैसला
झाँसी। टिकट बेचने सहित अन्य आरोपों से घिरे बसपा के विवादित पदाधिकारी नौशाद अली की आखिर बुंदेलखंड और कानपुर जोन से छुट्टी कर दी गई है। उनकी जगह अशोक सिद्धार्थ को यहां का प्रभार दिया गया है।
बसपा के लिए बीते पांच साल बेहद खराब रहे। लोकसभा के बाद विधानसभा चुनाव में भी बसपा को करारी मात खानी पड़ी। यही नहीं निकाय चुनाव में भी उसे खास सफलता नहीं मिली। बुंदेलखंड और कानपपुर जोन के प्रभारी नौशाद अली पर पैसे लेकर टिकट बेचने और पूर्व घोषित प्रत्याशियों का टिकट एनवक्त पर काटकर दूसरे को देने के आरोप लगे। बीकेडी के बाहर नामांकन के समय उन्हें कार्यकर्ताओं के कोप का भाजन भी बनना पड़ा था। उनके खिलाफ जमीनी कार्यकर्ताओं ने भी जबर्दस्त प्रदर्शन किया था। कहा जाता है कि नौशाद अली बसपा के निष्ठावान कार्यकर्ताओं को तवज्जो नहीं देते और पुराने लोगों से उनके अच्छे संबंध नहीं हैं। अपने विरोधियों को निपटाने के लिए वह हर रणनीति अपनाते हैं। उनका लक्ष्य नसीमुद्दीन सिद्दीकी की जगह पाना है। उन्हीं के कारण बसपा के लिए जीजान से जुटे रहे तिलक अहिरवार को पार्टी से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। आखिरकार बसपा सुप्रीमो मायावती ने आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर नौशाद अली से बुंदेलखंड और कानपुर जोन का प्रभार छीनते हुए राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को जिम्मेदारी दी गई है। साथ ही पूर्व नेता प्रतिपक्ष गयाचरन दिनकर, लालाराम अहिरवार और जितेंद्र शंखवार को भी उनके साथ संबद्ध किया गया है।

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