सूचना तंत्र के जनक थे देवर्षि नारद: हरगोविन्द

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झांसी। बुन्देलखण्ड साहित्य संगीत कला संस्थान के तत्वावधान में रानी महल स्थित गोपीनाथ मंदिर प्रांगण में देवर्षि नारद मुनि जयंती पर नारद जी के भव्य स्वरूप की झांकी का पूजन अर्चन कर किया गया। इस अवसर पर हुई विचार गोष्ठी में मुख्य अतिथि राज्यमंत्री हरगोविन्द कुशवाहा ने कहा कि नारद मुनि तपस्वी संत ने तपस्या के बल पर समाज के कल्याण के कार्य किये संकट में जब भी संत हुए तब नारद मुनि ने उनका संकट हरण किया।
अध्यक्षता करते हुये संस्थान के अध्यक्ष रवीश त्रिपाठी ने कहा कि महामुनि नारद जी समाज के लिये आदर्श हैं उनके जीवन से त्याग, तपस्या एवं कल्याण की भावना शिक्षा लेना चाहिए।
एमएलसी प्रतिनिधि आर.पी. निरंजन ने कहा कि दासी पुत्र, भूमि भार हर्ता, सूचना तंत्र के जनक देवर्षि नारद जी ने अपना जीवन कुशल क्षमतावान दास्य भाव ने समर्पित किया।
गोष्ठी में जिला धर्माचार्य महन्त विष्णु दत्त स्वामी, इंजी. मयंक श्रीवास्तव, अखिलेश पाण्डेय, मार्तण्ड स्वामी, रजत त्रिपाठी, बाबूलाल जारौलिया, सुरेन्द्र तिवारी, कुलदीप शर्मा, गंगापाल, सुभाष चैरसिया, कालीचरन पटैरिया, राजकुमार शास्त्री, नरेन्द्र जारौलिया, महेश पाण्डे, कालीचरन महाराज, के.सी. आॅनियाल, राधे चैबे आदि ने देवर्षि नारद मुनि के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि मानस पुत्र नारद मुनि को सभी देवतागण आदर सत्कार करते हैं और नारद देवताओं की कथनी और करनी दोनों का बखान एक दूसरे देवताओं से करते थे। देवताओं की हर बात की जानकारी रखने वाले गुणवान नारद जी सभी देवता उनके ब्रह्माण्ड में आगमन पर सोच में पड़ जाते थे कि शायद पता नहीं नारद क्या कहने वाले हैं। प्रारम्भ में नारायण-नारायण की ध्वनि से मंदिर परिसर गंुजायमान हो रहा था मानो साक्षात् ब्रह्मलोक से नारद जी पधार रहे हों। अंत में नारद मुनि की आरती से कार्यक्रम का समापन हुआ। संचालन अंकुर अग्रवाल ने एवं आभार संजीव शर्मा एवं पंकज पाराशर एड. ने व्यक्त किया।

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