रसियन पद्धति से हुई खेती के आश्चर्यजनक परिणाम आये, हुई अधिक पैदावार: यशपाल

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झांसी। रसियन पद्धति से की गई जैविक खेती के झाँसी में आश्चर्यजनक परिणाम सामने आये हैं। इस खेती में काफी अच्छी फसल ग्रोथ हुई है।
उल्लेखनीय है कि जनवरी माह में रसियन वैज्ञानिकों का एक दल मि. सुमिलोव लोरी के नेतृत्व में झाँसी आया था और यहाँ के तिलैथा, मुस्तरा और भोजला गांव में चुनिंदा खेतों में रसियन बायोडेक्स, ऑर्गेमिका-पी और सेव द वैक्टेरिया पदार्थ के सममिश्रण से अनाज बोया। इस जैविक खेती के 5 माह बाद आश्चर्यजनक परिणाम सामने आये हैं। ग्राम भोजला में पूर्व प्रधान हरगोविंद के खेत में एक एकड़ में उक्त रसियन पद्धति से बोयी गई फसल में 17 कुंतल अनाज की पैदावार हुई जबकि देसी तरीके से अन्य एक एकड़ में बोई गई फसल में मात्र 12 कुंतल गेंहू उत्पादित हुआ। इसके अलावा मुस्तरा में भी अधिक पैदावार हुई है।
भारतीय राष्ट्रीय सहकारिता संघ के निदेशक यशपाल सिंह यादव ने बताया कि भोजला के अलावा जिन अन्य स्थानों पर रसियन पद्धति से फसल बोई गई थी वहां भी अधिक फसल उत्पादित हुई है। उन्होंने बताया कि बुंदेलखंड के लिए ये पद्धति वरदान है। आने वाले दिनों में सभी किसानों को इसका लाभ मिले इस पर कार्य योजना बनाई जा रही है।

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